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श्री महाकाली माता की आरती
शत्रु संहारिणी एवं अभय प्रदायिनी माँ महाकाली की पावन आरती।
गीत / Lyrics
॥ श्री Goddess Kali नमः ॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
सुन जगदम्बा कर न विलंबा, संतन के भंडार भरे।
खड्ग खप्पर त्रिशूल बिराजे, शीश मुंड की माल धरे॥
रक्तबीज को मार गिराया, चंड-मुंड के शीश हरे।
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे पल में, सुर मुनि सब जयकार करे॥
आरती महाकाली मैया की, जो नर-नारी प्रेम से गावे।
कहत धरणीधर ध्यान लगावे, मनवांछित फल पावे॥
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
नकारात्मक ऊर्जा, भय, शत्रु पीड़ा और बाधाओं का तत्काल नाश होता है।
विस्तृत सामग्री
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
सुन जगदम्बा कर न विलंबा, संतन के भंडार भरे।
खड्ग खप्पर त्रिशूल बिराजे, शीश मुंड की माल धरे॥
रक्तबीज को मार गिराया, चंड-मुंड के शीश हरे।
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे पल में, सुर मुनि सब जयकार करे॥
आरती महाकाली मैया की, जो नर-नारी प्रेम से गावे।
कहत धरणीधर ध्यान लगावे, मनवांछित फल पावे॥
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