सीधे सामग्री पर जाएँ
धनतेरस एवं भगवान धन्वंतरि प्राकट्य कथा
← कथा पर जाएं

धनतेरस एवं भगवान धन्वंतरि प्राकट्य कथा

समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि और यमदीप दान की कथा।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Dhanvantari नमः ॥
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस (धनत्रयोदशी) का पावन पर्व मनाया जाता है। इसी दिन देवताओं और असुरों द्वारा किए गए क्षीरसागर के समुद्र मंथन से चौदह रत्नों में भगवान धन्वंतरि अपने करकमलों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक हैं। वे समस्त मानव जाति को रोगों, व्याधियों और अकाल मृत्यु से मुक्त करने के लिए अवतरित हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन नए बर्तन, सोना, चांदी और औषधि खरीदने की परंपरा है। इस दिन यमराज के निमित्त सायं काल घर के मुख्य द्वार पर 'यमदीप' प्रज्वलित किया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के नवविवाहित पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उसकी पत्नी ने चौथे दिन पूरे महल को दीपों से सजाया और द्वार पर सोने-चांदी के ढेर लगा दिए तथा पति को जगाए रखा। जब यमराज सर्प रूप में आए, तो दीपों के प्रकाश और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे खाली हाथ लौट गए।
ॐ ॐ ॐ
इन-आर्टिकल विज्ञापन

लाभ

अकाल मृत्यु से रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य, और घर में स्थिर लक्ष्मी व संपन्नता का वास।

विस्तृत सामग्री

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस (धनत्रयोदशी) का पावन पर्व मनाया जाता है। इसी दिन देवताओं और असुरों द्वारा किए गए क्षीरसागर के समुद्र मंथन से चौदह रत्नों में भगवान धन्वंतरि अपने करकमलों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक हैं। वे समस्त मानव जाति को रोगों, व्याधियों और अकाल मृत्यु से मुक्त करने के लिए अवतरित हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन नए बर्तन, सोना, चांदी और औषधि खरीदने की परंपरा है। इस दिन यमराज के निमित्त सायं काल घर के मुख्य द्वार पर 'यमदीप' प्रज्वलित किया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के नवविवाहित पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उसकी पत्नी ने चौथे दिन पूरे महल को दीपों से सजाया और द्वार पर सोने-चांदी के ढेर लगा दिए तथा पति को जगाए रखा। जब यमराज सर्प रूप में आए, तो दीपों के प्रकाश और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे खाली हाथ लौट गए।
HINDI Festival Katha Lord Dhanvantari 12:00
6 पठित 0 पसंद 0 शेयर

संबंधित सामग्री

Comments (0)

Loading comments...

0/2000