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भाई दूज (यम द्वितीया) पावन कथा
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भाई दूज (यम द्वितीया) पावन कथा

यमराज और यमुना जी के पावन भ्रातृ-प्रेम की अमर कथा जो अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाती है।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Shani नमः ॥
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज (यम द्वितीया) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक कर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। सूर्यपुत्री यमुना अपने भाई यमराज से अत्यंत स्नेह करती थीं। वे सदा यमराज से अपने घर आकर भोजन करने का निवेदन करती थीं, किन्तु यमराज अपने दायित्वों में व्यस्त रहते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अचानक अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना जी ने अत्यंत हर्षित होकर भाई का स्वागत किया, उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया और मंगल तिलक लगाया। यमराज ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा। यमुना जी ने कहा— 'हे भ्राता! मैं यही वर मांगती हूँ कि आज के दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका सत्कार स्वीकार करेगा और तिलक करवाएगा, उसे आपकी अकाल मृत्यु और यमयातना का भय नहीं रहेगा।' यमराज ने तथास्तु कहा और तभी से भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अमर प्रेम के रूप में मनाया जाने लगा।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ

भाई की दीर्घायु, अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और भाई-बहन के प्रेम में प्रगाढ़ता।

विस्तृत सामग्री

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज (यम द्वितीया) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक कर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। सूर्यपुत्री यमुना अपने भाई यमराज से अत्यंत स्नेह करती थीं। वे सदा यमराज से अपने घर आकर भोजन करने का निवेदन करती थीं, किन्तु यमराज अपने दायित्वों में व्यस्त रहते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अचानक अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना जी ने अत्यंत हर्षित होकर भाई का स्वागत किया, उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया और मंगल तिलक लगाया। यमराज ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा। यमुना जी ने कहा— 'हे भ्राता! मैं यही वर मांगती हूँ कि आज के दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका सत्कार स्वीकार करेगा और तिलक करवाएगा, उसे आपकी अकाल मृत्यु और यमयातना का भय नहीं रहेगा।' यमराज ने तथास्तु कहा और तभी से भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अमर प्रेम के रूप में मनाया जाने लगा।
HINDI Festival Katha Lord Shani 11:00
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