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शरद पूर्णिमा व्रत कथा
सोलह कलाओं से युक्त चंद्रमा की अमृत वर्षा एवं भगवान श्रीकृष्ण की महारास कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Krishna नमः ॥
आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा (रास पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत की वर्षा करता है।
प्राचीन समय में एक साहुकार की दो पुत्रियां थीं। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी पुत्री नियमपूर्वक पूरा व्रत करती थी, जबकि छोटी पुत्री अधूरा व्रत रखकर भोजन कर लेती थी। परिणामस्वरूप छोटी पुत्री की संतानें जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थीं।
एक बार महर्षि ने उसे बताया कि यह तुम्हारे अधूरे व्रत का दोष है। उसने शरद पूर्णिमा का पूर्ण व्रत किया। जब उसका पुनः बालक हुआ और वह भी मृत हो गया, तो उसने बालक को पीढ़े पर लिटाकर ऊपर कपड़ा ढक दिया और अपनी बड़ी बहन को बैठने के लिए कहा। जैसे ही बड़ी बहन का घाघरा उस बालक से स्पर्श हुआ, वह रोता हुआ जीवित हो उठा। बड़ी बहन के सत और व्रत के प्रभाव से बालक को जीवन मिला। इसी रात वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग दिव्य महारास रचाया था।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
संतान की रक्षा, असाध्य रोगों का शमन और घर में अमृतमयी शांति का वास।
विस्तृत सामग्री
आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा (रास पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत की वर्षा करता है।
प्राचीन समय में एक साहुकार की दो पुत्रियां थीं। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी पुत्री नियमपूर्वक पूरा व्रत करती थी, जबकि छोटी पुत्री अधूरा व्रत रखकर भोजन कर लेती थी। परिणामस्वरूप छोटी पुत्री की संतानें जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थीं।
एक बार महर्षि ने उसे बताया कि यह तुम्हारे अधूरे व्रत का दोष है। उसने शरद पूर्णिमा का पूर्ण व्रत किया। जब उसका पुनः बालक हुआ और वह भी मृत हो गया, तो उसने बालक को पीढ़े पर लिटाकर ऊपर कपड़ा ढक दिया और अपनी बड़ी बहन को बैठने के लिए कहा। जैसे ही बड़ी बहन का घाघरा उस बालक से स्पर्श हुआ, वह रोता हुआ जीवित हो उठा। बड़ी बहन के सत और व्रत के प्रभाव से बालक को जीवन मिला। इसी रात वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग दिव्य महारास रचाया था।
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