← कथा पर जाएं
श्री राम नवमी पावन प्राकट्य कथा
अयोध्या धाम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की परम पावन कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Rama नमः ॥
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अयोध्या धाम में पावन प्राकट्य हुआ था।
अयोध्या नरेश महाराजा दशरथ धर्मात्मा और प्रतापी थे, किन्तु वृद्धावस्था तक कोई संतान न होने से दुखी थे। वे कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी के पास गए। गुरुदेव के आदेश से महर्षि ऋष्यशृंग ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया।
यज्ञ कुंड से साक्षात अग्निदेव हाथ में सोने की थाली में खीर (पायस) का प्रसाद लेकर प्रकट हुए। राजा दशरथ ने वह प्रसाद अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में वितरित किया। चैत्र नवमी के पावन दिन जब पांचों ग्रह अपने उच्च स्थान पर थे, तब कौशल्या जी के गर्भ से साक्षात परब्रह्म परमात्मा भगवान श्री राम प्रकट हुए।
'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥'
समस्त अयोध्या धाम में आनंद का सागर उमड़ पड़ा, देवताओं ने पुष्प वर्षा की और गंधर्वों ने मंगल गान गाया।
ॐ ॐ ॐ
इन-आर्टिकल विज्ञापन
लाभ
मन में धर्म, मर्यादा, और शांति की स्थापना तथा भगवान राम की अहैतुकी कृपा।
विस्तृत सामग्री
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अयोध्या धाम में पावन प्राकट्य हुआ था।
अयोध्या नरेश महाराजा दशरथ धर्मात्मा और प्रतापी थे, किन्तु वृद्धावस्था तक कोई संतान न होने से दुखी थे। वे कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी के पास गए। गुरुदेव के आदेश से महर्षि ऋष्यशृंग ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया।
यज्ञ कुंड से साक्षात अग्निदेव हाथ में सोने की थाली में खीर (पायस) का प्रसाद लेकर प्रकट हुए। राजा दशरथ ने वह प्रसाद अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में वितरित किया। चैत्र नवमी के पावन दिन जब पांचों ग्रह अपने उच्च स्थान पर थे, तब कौशल्या जी के गर्भ से साक्षात परब्रह्म परमात्मा भगवान श्री राम प्रकट हुए।
'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥'
समस्त अयोध्या धाम में आनंद का सागर उमड़ पड़ा, देवताओं ने पुष्प वर्षा की और गंधर्वों ने मंगल गान गाया।
Comments (0)