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वट सावित्री व्रत कथा
यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाने वाली सती सावित्री की पावन अमर कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Shiva नमः ॥
ज्येष्ठ मास की अमावस्या (अथवा पूर्णिमा) को सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं और वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं।
मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने साल्व देश के निर्वासित और दृष्टिहीन राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में वरण किया। देवर्षि नारद ने बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और ठीक एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। किन्तु सावित्री अपने निर्णय पर अटल रही।
मृत्यु के निश्चित दिन जब सत्यवान वन में लकड़ी काटते समय अचेत हो गए, तो यमराज उनके प्राण लेने आए। सावित्री यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने बहुत रोका, किन्तु सावित्री के धर्म, पतिव्रत और तार्किक वचनों से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिए— ससुर की आंखें और राज्य वापस मिला, पिता को सौ पुत्र मिले और अंत में सावित्री को सौ तेजस्वी पुत्रों की माता होने का वरदान दिया। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तो सावित्री ने कहा कि बिना पति के मैं पुत्रवती कैसे हो सकती हूँ? विवश होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
अखंड सौभाग्य, पति की अकाल मृत्यु से रक्षा और परिवार में अमर यश की प्राप्ति।
विस्तृत सामग्री
ज्येष्ठ मास की अमावस्या (अथवा पूर्णिमा) को सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं और वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं।
मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने साल्व देश के निर्वासित और दृष्टिहीन राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में वरण किया। देवर्षि नारद ने बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और ठीक एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। किन्तु सावित्री अपने निर्णय पर अटल रही।
मृत्यु के निश्चित दिन जब सत्यवान वन में लकड़ी काटते समय अचेत हो गए, तो यमराज उनके प्राण लेने आए। सावित्री यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने बहुत रोका, किन्तु सावित्री के धर्म, पतिव्रत और तार्किक वचनों से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिए— ससुर की आंखें और राज्य वापस मिला, पिता को सौ पुत्र मिले और अंत में सावित्री को सौ तेजस्वी पुत्रों की माता होने का वरदान दिया। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तो सावित्री ने कहा कि बिना पति के मैं पुत्रवती कैसे हो सकती हूँ? विवश होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए।
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