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कराग्रे वसते लक्ष्मीः
सनातन धर्म की प्रात:कालीन दैनिक दिनचर्या का प्रथम करदर्शन मंत्र।
गीत / Lyrics
॥ श्री Goddess Lakshmi नमः ॥
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
ॐ ॐ ॐ
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संस्कृत पाठ
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
Transliteration
Karaagre Vasate Lakshmih Karamadhye Saraswati, Karamoole Tu Govindah Prabhaate Karadarshanam.
अर्थ
हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी जी, मध्य में सरस्वती जी और मूल भाग में भगवान श्री गोविंद का वास है। अतः प्रातः काल अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।
लाभ
दिनभर के कार्यों में सफलता, लक्ष्मी व सरस्वती की कृपा और शुभता का उदय।
कैसे जपें
प्रातः सोकर उठते ही बिस्तर पर बैठकर दोनों हथेलियों को जोड़कर दर्शन करते हुए जपें।
विस्तृत सामग्री
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
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