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मनोजवं मारुततुल्यवेगं
श्री हनुमान जी के दिव्य गुणों और वेग को नमन करता पवित्र ध्यान श्लोक।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Hanuman नमः ॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
ॐ ॐ ॐ
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संस्कृत पाठ
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
Transliteration
Manojavam Maaruta Tulya Vegam Jitendriyam Buddhimataam Varishtam, Vaataatmajam Vaanarayutha Mukhyam Shri Rama Dootam Sharanam Prapadye.
अर्थ
जिनका मन के समान वेग और वायु के समान गति है, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ हैं, पवनपुत्र और वानर सेना के मुख्य नायक, ऐसे श्रीरामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।
लाभ
भय, चिंता और मानसिक दुर्बलता का नाश होता है। बुद्धि और गति में तीव्रता आती है।
कैसे जपें
नित्य पूजा और यात्रा से पूर्व श्रद्धापूर्वक 3 या 11 बार स्मरण करें।
विस्तृत सामग्री
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
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