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बृहस्पतिवार व्रत कथा
देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की कृपा प्रदायिनी बृहस्पतिवार व्रत कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Vishnu नमः ॥
प्राचीन काल में एक बहुत ही दानी और धर्मात्मा राजा राज्य करता था। उसकी रानी अत्यंत कृपण (कंजूस) थी। वह किसी को भिक्षा नहीं देती थी।
एक दिन एक साधु भिक्षा मांगने आए। रानी ने कहा— 'मुझसे यह दान-पुण्य नहीं होता, मेरा सारा धन ही समाप्त हो जाए ताकि मुझे किसी को कुछ न देना पड़े।' साधु ने कहा— 'यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है, तो बृहस्पतिवार को घर लीपना, पुरुषों से हजामत बनवाना और कपड़े धोना।' रानी ने ऐसा ही किया। सात बृहस्पतिवार में राजा का सारा धन-वैभव समाप्त हो गया और वे दाने-दाने को तरसने लगे।
राजा परदेश जाकर मजदूरी करने लगा। इधर रानी और उसकी बहन भूख से व्याकुल हो गईं। बहन ने बृहस्पति देव का व्रत करने का उपदेश दिया। रानी ने विधिपूर्वक पीले वस्त्र पहनकर, चने की दाल और मुनक्का अर्पित कर कथा सुनी। बृहस्पति देव की कृपा से उनका सारा खोया हुआ वैभव पुनः लौट आया।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
धन-धान्य, विद्या, पुत्र सुख, और वैवाहिक बाधाओं का निवारण होता है।
विस्तृत सामग्री
प्राचीन काल में एक बहुत ही दानी और धर्मात्मा राजा राज्य करता था। उसकी रानी अत्यंत कृपण (कंजूस) थी। वह किसी को भिक्षा नहीं देती थी।
एक दिन एक साधु भिक्षा मांगने आए। रानी ने कहा— 'मुझसे यह दान-पुण्य नहीं होता, मेरा सारा धन ही समाप्त हो जाए ताकि मुझे किसी को कुछ न देना पड़े।' साधु ने कहा— 'यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है, तो बृहस्पतिवार को घर लीपना, पुरुषों से हजामत बनवाना और कपड़े धोना।' रानी ने ऐसा ही किया। सात बृहस्पतिवार में राजा का सारा धन-वैभव समाप्त हो गया और वे दाने-दाने को तरसने लगे।
राजा परदेश जाकर मजदूरी करने लगा। इधर रानी और उसकी बहन भूख से व्याकुल हो गईं। बहन ने बृहस्पति देव का व्रत करने का उपदेश दिया। रानी ने विधिपूर्वक पीले वस्त्र पहनकर, चने की दाल और मुनक्का अर्पित कर कथा सुनी। बृहस्पति देव की कृपा से उनका सारा खोया हुआ वैभव पुनः लौट आया।
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